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मेरी पहली कविता -" मेरे प्यारे हिन्दोस्तां ये आज क्या हो रहा है!"

Posted On: 25 Dec, 2010 Others में

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आज मै अपनी रचित कविता पोस्ट कर रहा हूँ| मेरा पाठकों से अनुरोध है कि अपनी बहुमूल्य राय अवश्य दें|


जहाँ लिखी जाती थी कहानी मुहब्बत की,
जहाँ खिलते थे फूल बागों मे अमन के|
कहाँ गुम हो गयी है वो मुहब्बत,
बची है यहाँ सिर्फ नफरत ही नफरत|
आतंक का फसाना लिखा जा रहा है,
मेरे प्यारे हिन्दोस्तां ये आज क्या हो रहा है|


चारों ओर भृष्टाचार छाया है,
मंहगाई ने जीना दुर्लभ बनाया है|
गरीब भूख से मर रहा है,
अमीर अपनी जेबें भर रहा है|
अपराधों पर अंकुश नाकाम हो रहा है,
मेरे प्यारे हिन्दोस्तां ये आज क्या हो रहा है|

नोट के लिए यहाँ कत्ल हो रहे हैं,
वोट के लिए षडयंत्र हो रहे हैं|
सच्चा देश प्रेम अब इतिहास बन रहा है,
देश को लूटना नेताओं का कम बन रहा है|
झूठ का अब तो सत्कार हो रहा है,
मेरे प्यारे हिन्दोस्तां ये आज क्या हो रहा है|

जहाँ कभी होती थी अहिंसा की पूजा,
प्रेम ही प्रेम था नही था कुछ दूजा|
नही बचे हैं राम-भारत जैसे भाई,
नही बचा है श्रवण जैसा बेटा कोई|
अब दीपक बस यही पुकार रहा है,
मेरे प्यारे हिन्दोस्तां ये आज क्या हो रहा है|

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358 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

वाहिद के द्वारा
December 30, 2010

आप की पहली कविता का प्रयास अच्छा था| देश के वास्तविक हालात से रूबरू कराते शब्द सराहनीय हैं| वाहिद

    Deepak Sahu के द्वारा
    December 31, 2010

    वाहिद जी इसी तरह अपना आशीर्वाद बनाये रखें धन्यवाद दीपक

    Staysha के द्वारा
    July 12, 2016

    1) The savings from not using a realtor should go mostly to you, so make sure the price is nice & low.2) Ask the seller what provisions for consumating the sale they have made. Usually a lawyer or a realtor will draw up the pa.eowrrkpReferences :

December 25, 2010

दीपक भाई, लगता तो नहीं कि ये आपकी पहली कविता है. मैं तो इतना ही कहूँगा कि जो भी इस देश और समाज के हित में सोचता है और इस पर चिंतन करता है, वो मेरी नजर में राष्ट्रवादी है, और आपके भावों से भी ऐसा लगता है….धन्यवाद.

    deepakkumarsahu के द्वारा
    December 26, 2010

    राजेंद्र जी ये मेरी पहली कविता है, और मेरा पहला प्रयास है! और अगर आपको मेरी कविता पसंद आई तो मेरे लिए इससे बड़ी खुसी की बात दूसरी नहीं है! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया लिए कोटि-कोटि धन्यवाद!!!

    Wilhelmina के द्वारा
    July 12, 2016

    I know this if off topic but I’m looking into starting my own blog and was curious what all is needed to get set up? I’m assuming having a blog like yours would cost a pretty penny? I’m not very web smart so I’m not 100% sure. Any remntcendamioos or advice would be greatly appreciated. Thanks

rita singh \'sarjana\' के द्वारा
December 25, 2010

दीपक भाई , आज की हालत पर लिखी गयी आपकी कविता की भाव प्रस्तुति बहुत ही सुन्दर हैं l अच्छी पोस्ट पर बधाई l

    deepakkumarsahu के द्वारा
    December 26, 2010

    रीता जी! आज देश की हालत बहुत गंभीर है, एक महत्वपूर्ण बदलाव की जरूरत है! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया लिए कोटि-कोटि धन्यवाद!!! दीपक

rajkamal के द्वारा
December 25, 2010

इब्तदाये इश्क है रोता है क्या , आगे -२ देखिये होता है क्या …. सुन्दर भाव भरी कविता के लिए आपका धन्यवाद

    deepakkumarsahu के द्वारा
    December 26, 2010

    राज जी अभी तो देखना है आगे और क्या क्या है! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया लिए कोटि-कोटि धन्यवाद!!! दीपक

nishamittal के द्वारा
December 25, 2010

दीपक जी,बहुत अच्छी कविता लिखी है आपने .भाव भी प्रस्तुति भी.

    deepakkumarsahu के द्वारा
    December 26, 2010

    निशा जी यह मेरा पहला प्रयास है! और अगर आपको मेरी कविता पसंद आई तो मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया लिए कोटि-कोटि धन्यवाद!!! दीपक

    Kenelm के द्वारा
    July 12, 2016

    asi se hace si0;iia,&#823cl, enseñale a esos indios que significa la palabra HUMOR y que un CHISTE nunca debe ser motivo de insultos ni peleas,…, asi no lo entiendanmachu pichu fue un burdel donde las indias hacian shows de ruanas mojadas, el rey indio (proceneta) vendia las entradas a los moros (monos) y los colonos españoles tenian asientos VIP, alli debuto la mamá de chavez

roshni के द्वारा
December 25, 2010

दीपक जी आपकी कविता बहुत अच्छी है …… इसमें देश के प्रति जो चिंता जाहिर की गयी है आज हर युवा की यही चिंता है क्युकी देश से हम है और देश हम से है …… रौशनी

    deepakkumarsahu के द्वारा
    December 25, 2010

    रोशनी जी आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद दीपक

    drsinwer के द्वारा
    December 25, 2010

    रोशनी जी आप कह रही हो की देश हम से है उधर राहुल जी { युवराज ] यही सोच सोच कर बूढ़े होते जा रहे है की देश का पूरा वजन उनके उपर है I वैसे दीपक जी की कविता बहुत अच्छी लगी I


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