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स्वर्णिम भारत का अंधकारमय भविष्य!!

Posted On: 15 Jan, 2011 Others में

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जिन बच्चों को हम भविष्य के कर्णधार एवं सूत्रधार के रूप मे देखते हैं! जिन बच्चों मे हमे भावी नागरिक का प्रतिबिंब दिखता है क्या आज उन बच्चों का वर्तमान इतना अधिक हीन हो सकता है? जिन बच्चों को हम सोचते हैं कि भविष्य मे देश का संपूर्ण दायित्व उनके कंधों पर होगा, आज वही बच्चे दो वक्त कि रोटी के लिए वर्तमान से संघर्ष कर रहे हैं|
प्रायः हम देख सकते हैं कि जिन बच्चों के हाथों मे कलम व किताब होनी चाहिए, जिनका वर्तमान विद्यालयों मे व्यतीत होना चाहिए, वही बच्चे आज होटलों एवं ढाबों मे जूठे बर्तन साफ करते मिल जाते हैं| और जिन बच्चों को कालेजों मे होना चाहिए, वे बच्चे मज़दूरी करते दिखते हैं|
एक और इससे भी अधिक बुरा कार्य है जिसमे अधिकतर गरीब परिवार के बच्चों का बचपन व्यतीत हो रहा है, और वह है भीख माँगने का| सड़क पर बच्चे हाथ मे थाली या कटोरा लिए भीख मांगते आसानी से देखे जा सकते हैं| और वे ऐसा करें क्यूँ न? आज उन्हे खाने के लिए दो वक्त कि रोटी नही नसीब होती है और जो खाने के दाने दाने का मोहताज़ है, वह भीख न मांगे, होटलों मे बर्तन न साफ करे, ,मज़दूरी न करे, तो और क्या करे? ऐसे हालात मे उन्हे शिक्षा प्राप्ति के लिए सोचना भी गुनाह है|
इनके खेलने कूदने एवं शिक्षा प्राप्ति के दिन भिक्षा माँगने एवं मज़दूरी माँगने मे व्यतीत हो रहे हैं| ऐसे मे उनके माता पिता ही क्या कर सकते हैं जो खुद गरीबी मे ज़िल्लत की ज़िंदगी जी रहे हैं| इन लोगों के लिए शिक्षा की कोई अहमियत नहीं है एवं निरर्थक है क्योकि क्योकि जीवन जीने के लिए पहले तो अपने पेट की अग्नि को शांत करना होता है, जब यह अग्नि शांत होगी तभी दिमाग आगे करने के लिए सोचेगा| लेकिन ऐसा हो तब ना|
सरकार भले ही शिक्षा प्रसार के लिए कितने ही कदम उठ ले, कितने ही गरीबी हटाओ अभियान चला ले, सब बेकार है| सरकार की योजनाएँ जैसे सर्व शिक्षा अभियान,निः शुल्क शिक्षा आदि सब कागजी ही प्रतीत हो रहे हैं| भले ही सरकार शिक्षा के क्षेत्र मे पैसे लूटा रही है पर वास्तविकता कुछ और ही है|
क्या यही है हमारा स्वर्णिम एवं विकाशशील भारत? क्या यही बच्चे है हमारे देश के भावी सूत्रधार ?

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43 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Deepak Sharma के द्वारा
February 11, 2017

दोस्तों अगर देश बचाना है तो आज देश के लिए हम लोगो को ही कदम उठाने होंगे. हम लोगो को किसी सरकार का इंतजार नहीं करना चाहिए क्योंकि यह देश अपना भी है . इसकी कमी को दूर करने के लिए हम लोगो को भी सरकार के साथ देना चाहिए और देश के विकास मैं अपना योगदान देना चाहिए .

Deepak Sharma के द्वारा
February 11, 2017

agar aaj hu kuch nhi karege to kal yahan baith kar article likhte hi rahege we should take some action against child labour. aaj hum kasam le ki hum apne jivan main kam se kam ek aise bache ko शिक्षा दे जो पढ़ नहीं सकता या बाल मजदूरी करता है तो एक दिन शायद बल मजदूरी ख़तम हो जायगी लेकिन उसके लिए आज हमे कदम उठाने होंगे.

Levitra के द्वारा
January 15, 2012

Hi! My mate has recommended me to have a look at your resource. And I’d like to say that I really value what you’re writing here.

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 19, 2012

    आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

rajeevdubey के द्वारा
February 17, 2011

अच्छा लेख.

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 19, 2012

    धन्यवाद! आपका

RAJAT के द्वारा
January 26, 2011

Deepak ji! Sachchayi ko bayan karta hai yah blog apka. Aaj bhi bahut sari problems hain jinhe hame par pana hai. Aur garibi to sabki jad hai!

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 2, 2011

    महोदय रजत जी!आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

anuj singh के द्वारा
January 25, 2011

Deepak bhai! Aaj hamare desh me poorn roop se asmanta vyapt hai. Kisi shayar ne theek hi kaha hai, ” kisi ki laas ko kafan nahi naseeb hota, aur kisi ki laas par tajmahal ban jate hain!” kuch aisa hi aaj hamare bharat me ho raha hai. Koyi pet bharne ke bad bhojan fek deta hai aur kisi ko pet me dalne ke liye roti ka ek tukda nahi nasib hota. Aise me bachcho ko bheekh mangane jaise kam mazboori me karne padte hain!

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 25, 2011

    भाई अनुज जी! सही तर्क दिये है अपने!  कुछ ऐसा ही हो रहा है! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

आर.एन. शाही के द्वारा
January 23, 2011

दीपक जी, ‘चाइल्ड इज द फ़ादर आँफ़ मैन’ की उक्ति यदि सही है, तो देश की जवानी के बारे में मात्र अटकलें लगाई जा सकती हैं । सचमुच अंधकारमय ही है सबकुछ । साधुवाद ।

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 24, 2011

    आदरणीय शाही जी!  आज हमारा देश विकाश की बुलंदियों को छू रहा है, लेकिन ये समस्याएँ इसकी सबसे बड़ी बाधक हैं!  पहले इन सब प्रकार की समस्यों से हमे निबटना होगा! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

ashutoshda के द्वारा
January 22, 2011

दीपक जी नमस्कार बहुत अच्छा प्रशन उठाया आपने , पर आप अभी से कहाँ इन चक्करों में फंस गए आपके तो अभी खेलने कूदने के दिन है ! बेहतरीन आलेख आशुतोष दा

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 24, 2011

    नमस्कार आशुतोष जी! अच्छा मज़ाक करते है आप! खेलने कूदने के दिन तो मै बहुत पहले ही छोड़ चुका हूँ!  आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

rita singh 'sarjana' के द्वारा
January 22, 2011

दीपक भाई , इसी बात का तो रोना हैं हमारे देश जहाँ विकाश की ओर अग्रसित हैं वही एक वर्ग आज भी सिर्फ खाने के बारे में सोचकर परेशान रहते हैं की अभी का तो हो गया अब शाम को क्या खायेंगे और दूसरी ओर जिसे खाने के लिए जरुरत न हो तो भी उसकी थाली को अच्छे भोजन से सजा दी जाती हैं l और वह खाना यूँ फेक दिया जाता हैं l अच्छे लेख के लिए बधाई l

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 24, 2011

    रीता जी! ऐसे मे देश चाहे जितना विकाश की बुलंदियों को छू ले, अंदर से खोखला ही रहेगा!  जिस देश के लोग या बच्चे भूखे सोते हैं, ऐसे देश का विकसित होने से फाइदा ही क्या! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

aditya के द्वारा
January 21, 2011

deepak ji! aisa jankar hame bahut dukh hota hai ki aaj bhi hamare desh me is tarah ki samsyaaen maujood hai! iske bare me jaroor kuchh sochna hoga! achchha lekh apke dwara

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 22, 2011

    सच है आदित्य जी जहां भारत विकसित देश बनने के ख्वाब देख रहा है, ऐसी समस्याए एक अभिशाप से कम नहीं हैं! आपकी प्रतिकृया के लिए हार्दिक धन्यवाद! दीपक

alok के द्वारा
January 20, 2011

दीपक जी! यह बहुत गम्भीर समस्या हैं। आपने हमे हमारे देश की इतनी बडी समस्या से अवगत कराया। धन्यवाद॥

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 20, 2011

    alok ji! dhanyavad to mujhe kahna chahiye jo aap mere blog me aakar apni mahatvpoorn pratikriya di! deepak

shailandra singh के द्वारा
January 19, 2011

सही लिखा की बच्चे काम नहीं करेगे तो भूखे मर जायेंगे? बाल मजदूरी एक विकत समिस्या है पर ज़रा सोच के देखिये की इन बच्चो से काम लेने वाला भी तो कोई है जो हम आप में से ही है उसकी इस बारे में कुछ अलग दलील है? रही बात जनसंख्या की उस पर देश की जनता कभे गंभीर हुयी ही नहीं? क्यों की उनका एक मात्र दवंग पन यही दीखता है. एक बात यहाँ मै अपनी और से जोड़ना चाहूंगा. शिक्षा के क्षेत्र में जितनी प्रगति निजी क्षेत्र ने की है उतनी सरकारी क्षेत्र ने नहीं की है आज भी दयानद सरस्वती और काइस्थ सभा और क्षत्रीय समाज के स्कूल कोलेज से चल रहे है .ये उनकी उदारता के प्रतीक है. जनसहयोग के विना कुछ भी नहीं हो सकता है और जहां चाह है वहाँ राह है. बढ़िया है बधाई हो.

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 20, 2011

    mahoday ji! bachchon ki aisi halat ke liye kaphi had tak unke mata pita bhi dosi hain, kyoki yeh halat aise parivaron me bahut kam hi hoti hai jinme KEVAL DO YA TEEN bachche hote hain, yadi mata pita gareeb hain aur bachchon ki puri team hai to aise halat to hona swabhavik hai! apki mahatvpoorn pratikriya ke liye bahut bahut dhanyavad! deepak

Arunesh Mishra के द्वारा
January 19, 2011

सही लिखा दीपक जी, जब लोग बल मजदूरी की बात करते है भूल जाते है की अगर वो बच्चे कम नहीं करेगे तो भूखो मर जायेगे या भीख मांगेगे. बिना सही विकल्पों के बाल मजदूरी को कभी नहीं रोका जा सकता है.

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 20, 2011

    mahoday ji! ham sabhi jante hain ki is samsya ki sabse badi jad nirdhanta hai. usi ke karan bachchon ko aisha kary karna padta hai, atah hame sabse pahle gareebi se nipatna hoga. apki pratikriya ke liye bahut bahut dhanyavad! deepak

alkargupta1 के द्वारा
January 18, 2011

दीपक जी , देश की ज्वलंत व गंभीर समस्या है…..सरकार की तो सभी योजनायें ही खोखली हैं…… बहुत ही संवेदनीय लेख पर लिखा है ..धन्यवाद !

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 18, 2011

    अलका जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

vandanapushpender के द्वारा
January 16, 2011

दीपक जी, आप ने विषय सही उठाया है शिक्षा हर बच्चे का जन्मसिद्ध अधिकार है मगर मेरा नजरिया कुछ और है इस विषय पर, मैं सोचती हूँ कि इतनी बड़ी जनसँख्या वाले देश में सरकार के उपर सब कुछ छोड़ कर बैठना ठीक नहीं है हर नागरिक का और अन्य संस्थाओं का फ़र्ज़ है कि हम भी अपना योगदान दें इस पुनीत कार्य में

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 17, 2011

    महोदया जी! आपका कहना सच है की अकेले सरकार पर हम ये सब नहीं छोड़ सकते हैं, जैसा की हम सभी जानते है की इन सब समस्याओं की जड़ निर्धनता है, इसे मिटाने के लिए हम क्या कर सकते हैं? आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

rajkamal के द्वारा
January 16, 2011

यार तुमसे तो इतने धीर गंभीर विषय पर ऐसे उत्तम विचारों की उम्मीद कतई नही थी ….

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 17, 2011

    राजकमल जी! ये सब तो आपका आशीर्वाद है! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

वाहिद काशीवासी के द्वारा
January 16, 2011

ज्वलंत प्रश्न उठाये हैं आपने|देश की कड़वी सच्चाई से परिचित कराती इस रचना के लिए बधाई हो,

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 17, 2011

    वाहिद जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! ऐसे ही आशीर्वाद बानाए रखें! धन्यवाद! दीपक

January 15, 2011

दीपक जी एक टचिंग इश्यु पर लिखने के लिए बधाई.

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 16, 2011

    धन्यवाद राजेंद्र जी! ऐसे ही कृपा बनाये रहिये! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

danishmasood के द्वारा
January 15, 2011

मैं आप की भावनाओं की कद्र करता हूँ इस विषय पे मेरी कविता बालश्रमिकों की प्रार्थना पढ़ें लेख के लिए बधाई …………………………………………………………

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 16, 2011

    दानिश जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

danishmasood के द्वारा
January 15, 2011

मैं आप की भावनाओं की कद्र करता हूँ इस विषय पे मेरी कविता बालश्रमिकों की प्रार्थना पढ़ें लेख के लिए धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
January 15, 2011

अच्छा लेख दीपक जी.इसी विषय पर मैंने भी लेख लिखा था “बचपन के दिन हैं उम्र खेलने की”

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 15, 2011

    Aadarneey nisha ji! Apki bahumoolya pratikriya ke liye bahut bahut dhanyavad. DEEPAK

naturecure के द्वारा
January 15, 2011

आदरणीय साहू जी, नमस्कार! यह सत्य है की बालश्रम आज की एक गंभीर समस्या है | बड़े-बड़े दावे करने के बाद भी सरकार इसे रोकने में नाकाम है, परन्तु केवल सरकार ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है | कही न कही हम भी इसके लिए दोषी हैं | हम सब को एवं सामाजिक संगठनों को इसके लिए आगे आना चाहिए, तभी देश को बालश्रम से मुक्ति मिल सकती है |

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 15, 2011

    Mahoday ji! Sach kaha apne. Akele sarkar is vikral samasya ko nahi katm kar sakti hai. Hame bhi aage haath badhana hoga. Lekin balshram ka sabse bada karan to garibi hai, iske liye ham kya kar sakte hain?? Apki bahumoolya pratikriya ke liye bahut bahut dhanyavad. DEEPAK

Aakash Tiwaari के द्वारा
January 15, 2011

श्री दीपक जी, बाल मजदूरी आजके वक्त में बहुत ही गम्भीर समस्या है……आजके वक्त में जब चारो ओर तरक्की की दौड़ लगी हुई है ऐसे वक्त में बाल मजदूरी देखकर बहुत बहुत दुःख होता है…..अगर लोग बच्चों से काम करवाते भी है तो कम से कम उनको वो सारी सुविधा दे जो अपने बच्चे को दे सकते है…… http://aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 15, 2011

    Aakash ji! Sach me yah badi samasya hai ki Aaj jahan bharat viksit desh banne ke sapne dekh raha hai waha Balshram jaisi bhayanak samsyaen vidyamaan hai. Isse bhi adhik kastkari pal vah hota hai jab ye aakhen kisi bachche ko bheekh mangate dekhti hain. Apki bahumoolya pratikriya ke liye bahut bahut dhanyavad. DEEPAK


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