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सोंच बदलो, देश बदलेगा!!

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सी बी आइ महिमा

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आज मै सी बी आइ जिसे हम सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन उर्फ क्लोसर ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन उर्फ काँग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के नाम से जानते है उसी की महिमा का बखान कर रहा हूँ कुछ अलग (देहाती) अंदाज मे! गौर फरमाईएगा!C B I

नाम किए हैं बड़े बड़े यह सी बी आइ हम तुमका बताई,
काम आज तक एकौ न करि पाई यह सी बी आइ,
केस आज तक एकौ न सुलझा पाई यह सी बी आइ,
हत्यारे भृष्टाचारी घूमि रहे हैं इसकी दया पाई बोलें- जय जय सी ब आइ,
काहे ऐसा चमत्कार करे यह सी बी आइ, हम तुमका बताई,
सुनो ध्यान से भैया लोगों कान लगाई हम तुमका समुझाई,
जो कौ न सुने ध्यान से वह अपने देश कै लुटिया डुबाइ,
अतः सुनो भैया ध्यान लगाई!!

है बस मा अपनी सरकार के सी बी आइ हम तुम का बताई,
उसके मर्ज़ी कै खिलाफ कछु न करि पाई कछु न करि पाई!
अगर किसी भृष्ट को पकड़े सी बी आइ, हम तुमका बताई!
तो मैडम से पूछे है यह सी बी आइ, हम तुमका बताई,
“ बताओ इसका का करी छोड़ दई, केस चलाई या सज़ा दिलाई!!”
मैडम जी बोले “यह तो अपना बंदा है कैसे इसको हम है फसाई?
कैसे इसको हम है फसाई कैसे इसको सज़ा दिलाई?
इसे फाँसकर कैसे भैया हम अपनी सरकार गिराई,
खड़ी है सरकार इसके सहयोग पर, कैसे अपना पैर खुदई तोड़ जाई??”

सी बी आइ बोल पड़ी इतने मा “अब चिंता की कोई बात न आई,
चिंता की कोई बात न आई, अपना बंदा जैल न जाई!!”
अब कुछ दिन नाटक करके जांच कराई, केश चलाई यह सी बी आइ!
इसके बाद पूरे केश की फाइल बंद कर जाई यह सी बी आइ!!
केश यहीं से खतम होई जाई, बोलो जय जय सी बी आइ!!

तो भैया हुकूमत के इशारों पर चलती है यह अपनी सी बी आइ!!
इनकी महिमा कौ न समझी पाई, बोलो जय जय सी बी आइ!!

ऐसी हालत बनी रही तो देश कै अपने लुटिया डुबाइ यह सी बी आइ!
ऐसे डूबेगी लुटिया की संभाले किसी के संभल न पाई!!
ऐसा बिगड़ी देश का यह की देश दुबारा सुधार न पाई!!

तो भैया हम अबहीन कहते हैं आगे का कछु सोच लौ आए,
नहीं तो बाद मे फिर न कहना दीपक नहीं था कछु बतलाए!!

तो भैया लोगों बोलो इस बारे मे आपके क्या विचार हैं???

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27 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
February 7, 2011

अब तो इस सरकारी संस्था को ही क्लोसे कराओ दीपक भाई. वैसे इस सी. बी. आइ. की महिमा खूब समझमें आई, बधाई हो बधाई. अब हमको भी समझ में आई की क्यों सबलोग मांग करते हैं इस घटना को सी. बी. आइ. से जाँच करा दो भाई. वसे जे. पी. सी. के बारे में आपकी क्या राय है भाई! जरा हमको भी समझाई.क्या ये दोनों नहीं हैं भाई भाई!

shailandraa singh के द्वारा
January 29, 2011

दीपक जी बढ़िया है मज़ा आ गया. बधाई हो. शैलन्द्र सिंह

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 2, 2011

    महोदय जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

allrounder के द्वारा
January 27, 2011

भाई दीपक जी , सी बी आई की हकीकत कवितामय रूप से पेश करने पर आपको बधाई ! आपकी कविता एक सच्चाई बयां करती है की हमारी सर्वोच्च investigation संस्था सरकार के अधीन है, और आरुषी हत्याकांड का उजागर न कर पाना इसकी क़ाबलियत पर सवालिया निशान खड़े करती है ! एक अच्छी प्रस्तुति पर बधाई !

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 2, 2011

    सचिन जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

RAJAT के द्वारा
January 26, 2011

Deepak ji! C b i mahima kavita me kya baat hai, badhiya varnan kiya apne. Aaj cbi ko jis prakar kam karna chahiye vaisa nahi kar pa rahi hai. Aur kare bhi to kaise operator to koyi aur hi hai!

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 26, 2011

    महोदय रजत जी! आपको मेरी रचना पसंद आई, बहुत बहुत धन्यवाद! और आपकी प्रतिकृया के लिए भी! दीपक

January 25, 2011

भाई दीपक जी आपकी कविता तो जोरदार थी ही, फोटो देखकर भी तबीयत हरी हो गयी. बहत अच्छे….भईया.

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 25, 2011

    धन्यवाद राजेंद्र जी! आपको मेरी कविता पसंद आई! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

rajkamal के द्वारा
January 25, 2011

दीपक जी …नमस्कार ! आपने सुंदर तुकबंदी रूपी कविता लिखी है …बहुत ही बढ़िया प्रयास किया है ….आपसे आगे और भी बहुत उम्मीदे रहेंगी ….. इतना तों आप जानते ही है कि मैं सही को सही और गलत को गलत कहने में जरा सी भी देर नही लगाता …. आप कि इस बात से मैं सहमत नही हूँ कि इस ससंथा ने कोई भी केस हल नही किया है ….. धन्यवाद

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 25, 2011

    राजकमल जी नमस्कार! सत्य वचन है आपके, लेकिन मै आपको एक बात बताना चाहूँगा की देश की सर्वोच्च जांच समिति होकर भी सी बी आई आज तक सुखराम को छोड़कर किसी बड़े राजनेता को सज़ा नहीं दिला पायी है, क्योकि वो सरकार के इशारों पर कार्य करती है! और ये जागरण अखबार के एक अंक मे प्रकसित है जो मै आपको बता रहा हूँ! अधिक जानकारी के लिए आप मेरा ब्लॉग \"एक महान परिवर्तन की दरकार!!\" पढ़ सकते है! अपने मेरे ब्लॉग मे आकार महत्वपूर्ण प्रतिकृया दी,इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

naturecure के द्वारा
January 24, 2011

रौशनी जी ने बिलकुल ठीक लिखा है , और आपने तो सी. बी. आई. की हकीकत बड़े अच्छे ढंग से व्यक्त की है …. बधाई!

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 25, 2011

    धन्यवाद महोदय जी! आपको मेरा लेख पसंद आया! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

roshni के द्वारा
January 24, 2011

deepak ji हमारे विचार बस आपके विचारों से ही मेल खाते है …… सीबीआई सिर्फ नाम की है काम की नहीं ……… मुझे तो आजतक नहीं पता की सीबीआई ने क्या कभी कोई केस हल भी किया है ………. जो जाँच या केस सीबीआई के पास चले जाये समझो अब तो फिर कमेटी पे कमेटी ही बैठेगी और होना जाना कुछ नहीं ….. अब चिंता की कोई बात न आई, चिंता की कोई बात न आई, अपना बंदा जैल न जाई!! सच कहा बिलकुल

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 25, 2011

    रोशनी जी! यह जानकार मुझे अति प्रसन्नता हुई की आपके विचार बस हमारे विचारों से ही मेल खाते है! कुछ दिन तो जांच करती है यह सी बी आई उसके बाद निष्कर्ष न मिलने पर फ़ाइल क्लोज़ कर दी जाती है, जैसा की आज आरुषि मर्डर केश मे हो रहा है! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

deepak pandey के द्वारा
January 24, 2011

ये नाम बहुत दिनों से सीबीआई को मेरे जेहन में आ रहा था . किस मुह से हम सीबीआई जाँच की बात करे जो बात बात पर हथियार डाल देती है और सर्कार की एजेंसी बन जाती है . कविता अछि है .

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 24, 2011

    दीपक जी आप मेरे ब्लॉग पर आए इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद! जैसा की आज कल सी बी आइ अपनी नाकामी की वजह से सुर्खियों मे है फ़ाइल बंद कर देना इसका कार्य बन गया है! ऐसे मे आज हम किसका भरोसा करें?  आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

आलोक त्रिपाठी के द्वारा
January 24, 2011

दीपक जी! एक जांच एजेंसी के तौर पर सी बी आई सिर्फ नाम के लिए काम कर रही है! केश सुलझाना इसके बस की बात नहीं रह गयी है!  कविता के माध्यम से अच्छा ब्लॉग आपका! धन्यवाद आलोक

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 24, 2011

    आलोक जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

nishamittal के द्वारा
January 23, 2011

दीपक जी,सी.बी.आई सरकार की जेबी एजेंसी है,सरकार चाहेगी तो फाईल बंद होगी और खोलना चाहेगी तो सालों बाद भी खुल जायेगी..

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 24, 2011

    आदरणीय निशा जी! आज हमे एक ऐसे भृष्टाचार निरोधक समिति की आवस्यकता है की जो अपने कार्यों के प्रति पूरन रूप से स्वतंत्र हो, जो किसी भी भृष्ट को सज़ा दिला सके! पर सी बी आई का कार्य इसके विपरीत है! इसके होने न होने से हमे कोई भी लाभ या हानी प्रतीत नहीं हो रहा है! ये हो सिर्फ सरकार के हाथो की कटपुटली बनकर कार्य कर रही है! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

abodhbaalak के द्वारा
January 23, 2011

देहाती जी सुन्दर रचना, आपकी सोच की उड़ान अब काफी ….. ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 24, 2011

    अबोध जी मुझे खुशी है की आपको मेरी यह रचना पसंद आई! पर काश j j के संपादकों को भी मेरी यह रचना पसंद आई होती! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद! दीपक

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 23, 2011

बढ़िया प्रस्तुति दीपक भाई………. सीबीआई कहीं न कहीं अपने दायित्वों को पूरा कर पाने मे नाकाम रही है…….. हाल ही मे जिस तरह आरुषि हत्याकांड मे सीबीआई ने केस बंद करने की अर्जी दी……… तो लगा की क्या ये उस भारत की जांच एजेंसी है जहां चारों ओर से अपराधी कभी भी आ ओर जा रहे है……….

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 23, 2011

    Piyush ji! Aaj c b i apne karyo ke prati poorn roop se asfal prateet ho rahi hai. File band karna uska karya ban gaya hai. Ab aise me akhir ham kis prakar ispar bharosha karen? आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।॥ दीपक

आर.एन. शाही के द्वारा
January 23, 2011

भाई दीपक जी, सीबीआई महात्म्य का खूब वर्णन किया आपने । बिल्कुल इसी भूमिका का निर्वहन करती आई है हमारी यह अनुसंधानिक संस्था । बधाई ।

    Deepak Sahu के द्वारा
    January 23, 2011

    आदरणीय शाही जी। सी बी आई कोई वैसा कार्य नही कर रही है जैसा कि एक जाँच समिति को करना चाहिए। वह सिर्फ सरकार के इशारोँ पर चल रही है जबकि इसे अपने कार्य के प्रति स्वतन्त्र होना चाहिए। यही समय की माँग है। आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।॥ दीपक


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