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प्रेम उसी को कहते हैं!!-“Valentine contest”

Posted On: 14 Feb, 2011 में

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आज मै “प्रेम” विषय पर कुछ स्वरचित पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ, कृपया अपनी महत्वपूर्ण राय अवश्य दे!


प्रेम शब्द के श्रवण मात्र से, मन पुलकित हो जाता है!

बंधन यह ऐसा जिसमे बंधकर, जीवन धन्य हो जाता है!!

यूं तो खिल जाते हैं फूल प्यार के, हर इक की फुलवारी मे,

प्रेम मे सब न्योछावर कर दे, उसका प्रेम अमर हो जाता है!!


पत्थर दिल को मृदुल बना दे, प्रेम उसी को कहते हैं!

जो नफरत की आग बुझा दे, प्रेम उसी को कहते हैं!!

मंद हवा मे जल जाते हैं यूं तो हर इक दीप मगर,

जो तूफान मे दीप जला दे, प्रेम उसी को कहते हैं!!


जाति धर्म का भेद मिटा दे, प्रेम उसी को कहते हैं!

भक्त हृदय मे भगवान बसा दे, प्रेम उसी को कहते हैं!!

यूं तो भटक जाते हैं मुसाफिर जीवन के किसी मोड़ पर,

जो भटके को राह दिखा दे, प्रेम उसी को कहते हैं!!

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1260 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sticky के द्वारा
July 12, 2016

That’s an ineetliglnt answer to a difficult question xxx

shab के द्वारा
February 25, 2011

deepak ji namskar………bahut acchi rachna hai aapki badhai ho aapko …

    Reggie के द्वारा
    July 12, 2016

    I am also not sure of what I want to do with my life and felt that the lecture was ingatidimint. It really made me start to think of what I really want to do once I graduate and what I should do to start preparing for my future.

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 21, 2011

    धन्यवाद ! मुनीश जी!

    Blue के द्वारा
    July 12, 2016

    I’m looking for 3 cheap starter boards for my triplets. They are only 10 years old and just starting out. Something kinda cheap (under a $100??) would be great! I live in Huntington but would like to come and see what you have, possibly next weekend. Any sutsiggeons? Thank you!

February 16, 2011

दीपक जी, प्रेम की सुन्दर परिभाषा… य्यों ही लिखते रहें……

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 16, 2011

    राजेंद्र जी! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

abodhbaalak के द्वारा
February 15, 2011

बेशक प्रेम वो ही Hai jo Ishwar tak pahuncha de agar ise sachchai ke sath ….. aise hil likhte rahen http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 16, 2011

    अबोध जी! सत्य कहा आपने! ये प्रेम ही तो है जिसके माध्यम से हम ईश्वर तक पहुँचते हैं, अगर हमारे अंदर प्रेम की भावना ही नहीं है तो हम इंसान को भी नहीं प्राप्त कर सकते हैं! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

ramugujar के द्वारा
February 15, 2011

पत्थर दिल को मृदुल बना दे, जो नफरत की आग बुझा दे, बहुत ही सुन्दर रचना है आपकी i बधाई और प्रतियोगिता के लिए हार्दिक शुभकामनाये

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 15, 2011

    महोदय जी! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

Amit Dehati के द्वारा
February 15, 2011
    Deepak Sahu के द्वारा
    February 15, 2011

    अमित जी! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

omprakash pareek के द्वारा
February 14, 2011

साहूजी, आपके ये उद्गार कि “पत्थर दिल को मृदुल बना दे प्रेम उसी को कहते हैं जो नफरत कि आग बुझा दे प्रेम उसी को कहते हैं ” प्रेम पर इतनी प्रेरणादायक पंक्तिया पढ़ कर दिल बाग़-बाग हो उठा. आपको ढेरों शुभ कामनाएं oppareek43

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद पारीक जी!

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 14, 2011

श्री दीपक जी , सुन्दर रचना… शुभकामनाओं सहित ‘ आकाश तिवारी

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    भ्राता आकाश जी! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

    Teyah के द्वारा
    July 12, 2016

    Well I’ll be a williewombat! There’s something new to learn everyday! I hadn’t seen the earlier post with the Roubo stuff about this kind of stool. Thanks for pointing it out.Amazing … There’s a much longer heritage to the design than I reaedsli.Thanks, Chris.

allrounder के द्वारा
February 14, 2011

बहुत बढ़िया शब्दों मैं प्रेम का महिमा मंडन किया है दीपक जी, शदों के सुन्दर संयोजन पर बधाई और प्रतियोगिता के लिए हार्दिक शुभकामनाये !

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    सचिन जी!  यह मेरे लिए अत्यंत खुशी की बात है की आपको मेरी रचना पसंद आई! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

rajni thakur के द्वारा
February 14, 2011

‘मंद हवा में जल जाते हैं यूँ तो हर एक दीप मगर, जो तूफां में दीप जला दे प्यार उसी को कहते हैं .’ सुन्दर पंक्तियाँ..बधाई.

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    रजनी जी! यह मेरे लिए अत्यंत खुशी की बात है की आपको मेरी रचना पसंद आई! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

    Joeie के द्वारा
    July 12, 2016

    I’m relaly into it, thanks for this great stuff!

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 14, 2011

दीपक जी आपके अन्दर एक उछाकोती का साहित्यकार है उसे निखारे.. और ऐसी रचनाये करते है ..बहुत अछि कविता है ..जो भटके को राह दिखा दे, प्रेम उसी को कहते हैं!!.. बहुत सुन्दर पंक्तिया शुभकामनाये

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    भ्राता निखिल जी! यह मेरे लिए अत्यंत खुशी की बात है की आपको मेरी रचनाएँ पसंद आई! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

    Gracelin के द्वारा
    July 12, 2016

    Moi, je mettrais « Undress like an enparnteress&nbsc;&haquo; [ parce que "princess" c'est juste déjà trop fait] parce que j’aime bien ce mot en anglais (je le trouve beaucoup plus beau qu’en français d’ailleurs) et aussi parce que j’ai baigné dans les histoires de fées, etc quand j’étais petite – d’ailleurs je confirme, les filles ça écrit en rose! Et PS: continue ton blog! (même si je ne laisse pour ainsi dire quasi, nan même jamais de commentaires je trouve que tu te débrouilles très très bien!)

deepak pandey के द्वारा
February 14, 2011

सुन्दर कविता के माध्यम से प्रेम को अच्छा परिभाषित किया है , दीपक जी आपने.

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    बंधु दीपक जी! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

rahul kumar (Bijupara,Ranchi) के द्वारा
February 14, 2011

फुलटू…..फटाक………..

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    राहुल जी! ई का कहि गए आप, हमका कछू समझ मा नाही आवा! दीपक

    Maralynn के द्वारा
    July 12, 2016

    ana / Se não finjo ele ainda lança comentários do género: “demoras-te muito a vi3&0#82r&;!#8221;.O problema é quando sucede a penetração, ele magoa-me pelo facto de ter um órgão largo e ligeiramente inclinado…A partir do momento em que sinto dor, quebro o prazerGostei deste comentário ou não: 2

rajkamal के द्वारा
February 14, 2011

प्रिय दीपक जी …नमस्कार ! प्रेम की बहुत ही सुंदर और सही व्याख्या की है आपने …. बधाई व शुभकामनाये

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    भ्राता राजकमल जी! यह मेरे लिए अत्यंत खुशी की बात है की आपको मेरी रचना पसंद आई! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

    Jaycee के द्वारा
    July 12, 2016

    reclamele postate la metrou si in zona fostului cinema Volga (acolo de unde s-au transmis imagini cu masinile in ultima vreme), Airbites mi se pare o mizerie, acum in lumina celor ce sunt povestite cu atat mai mult, nu am sugestii pt ca stii mai bine ca mine ca piata a inceput sa fie inghitita de cativa preirdoiv, asa ca oferta e destul de saraca, iar neplaceri cu duimul.

alkargupta1 के द्वारा
February 14, 2011

दीपक जी ,प्रेम शब्द की अभिव्यक्ति बहुत ही बढ़िया शब्दों में की है ! बधाई शुभकामनाओं सहित !

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    आदरणीय अल्का जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!!

nishamittal के द्वारा
February 14, 2011

दीपक जी इस कविता में आपने प्रेम के सही व व्यापक रूप के दर्शन कराए हैं शुभकामनाएं.

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    अदरणीय निशा जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!!

    Grizzly के द्वारा
    July 12, 2016

    i like how all videos say blottes and stuff can be pucsrahed at your local homebrew shop , seriously i lived in ATL and Charl. NC, bot major cities and havent found anything remotely close to thess so called homebrew shop

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 13, 2011

पत्थर दिल को मृदुल बना दे, प्रेम उसी को कहते हैं! जो नफरत की आग बुझा दे, प्रेम उसी को कहते हैं!! अमित भाई…. अब सही नब्ज़ पकड़ी है प्रेम की आपने….. बहुत सुन्दर व्याख्या प्रेम की…… सुन्दर रचना..हार्दिक बधाई…..

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    पीयूष जी! मुझे खुशी है की आपको मेरी रचना पसंद आई! पर ये क्या आपने तो मेरा नाम ही बदल दिया! आपकी प्रतिकृया के लिए कोटि कोटि धन्यवाद!! दीपक

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 14, 2011

    वैसे ये नाम भी कुछ बुरा नहीं है!

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 13, 2011

नमस्कार साहू जी… प्रेम को दर्शाती…. और समझाती सुंदर काव्य रचना …. दो पंक्तियाँ जो मुझे बेहद पसंद आई हैं वे हैं १. जो भटके को राह दिखा दे, प्रेम उसी को कहते हैं…. तथा… २. प्रेम मे सब न्योछावर कर दे, उसका प्रेम अमर हो जाता है आभार….

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 13, 2011

    हिमांशु जी नमस्कार! यह मेरे लिए अत्यंत खुशी की बात है की आपको मेरी पंक्तियाँ पसंद आई! आपकी प्रतिकृया के लिए पबहुत बहुत धन्यवाद!! दीपक

    Lakesha के द्वारा
    July 12, 2016

    Oh, vielen, vielen Dank für den Hinweis, da ist mir ein Fehler unterlaufen und es wurde von mir ca. 87 Sekunden Inhalt unheasctlrgen! Mea culpa.Habe das mal behoben. Neue Version ist jetzt online.

आर.एन. शाही के द्वारा
February 13, 2011

दिल की गहराइयों से निकली पंक्तियां दीपक जी … बधाई ।

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 13, 2011

    अदरणीय शाही जी! इसी तरह अपना आशीर्वाद बनाए रखें! आपकी प्रतिकृया के लिए कोटि कोटि धन्यवाद!! दीपक

    Cheyanne के द्वारा
    July 12, 2016

    Interesante entrevista RoAtk.cutényica basura; lo peor es que la gente lo aplaude, consume, y digiere con singular alegría. Sín saber los fatales resultados sociologicos, de conducta, convivencia, estereotipos, modelos de vida fallídos, que bloquean el crecimiento humano. Todos somos responsables de un pobre nivel educativo.

vinitashukla के द्वारा
February 13, 2011

सुन्दर विचार और सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई.

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 13, 2011

    विनीता जी! आपकी प्रतिकृया के लिए कोटि कोटि धन्यवाद!! दीपक

div81 के द्वारा
February 13, 2011

दीपक जी, यूं तो भटक जाते हैं मुसाफिर जीवन के किसी मोड़ पर, जो भटके को राह दिखा दे, प्रेम उसी को कहते हैं!! ………बिलकुल प्यार इसी को कहते है|

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 13, 2011

    दिव्या जी! मुझे खुशी है की आपको मेरी रचना पसंद आई! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!!

    Jesslyn के द्वारा
    July 12, 2016

    40!!!!!!!!!!! NOalthough I wished I was yesterdaywent for a long overdue womans test at the doctors and if Id been 40 it would have been freeas it was it cost me $NZ45!!!I do have one older daughter estranged (15 years old)Im 37

Ramesh bajpai के द्वारा
February 13, 2011

पत्थर दिल को मृदुल बना दे, प्रेम उसी को कहते हैं! जो नफरत की आग बुझा दे, प्रेम उसी को कहते हैं!! दीपक जी सच कहा आपने प्रेम इसी को कहते है ,| बधाई

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 13, 2011

    महोदय जी! आपको मेरी रचना पसंद आई! आभार!! आपकी बहुमूल्य प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!!

    Tailynn के द्वारा
    July 12, 2016

    Back in school, I’m doing so much leniarng.


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