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स्वतन्त्रता के मायने!

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आज जब लोग स्वतन्त्रता का उपभोग करते हैं, तो वे अक्सर भूल जाया करते हैं की उनके इस कार्य से किसी दूसरे की स्वतन्त्रता का हनन हो रहा है| उन्हे शायद यह याद नहीं रहता कि स्वतन्त्रता मे हमे जो अधिकार प्रदक्त किए गए हैं, उनके साथ हमे कुछ कर्तव्य भी निर्वाह करने के लिए दिये गए हैं| जब हम इन कर्तव्यों का भलीभाँति पालन करेंगे तभी हम सही अर्थ मे अपने स्वतन्त्रता और अपने अधिकारों का उपभोग कर पाएंगे!

जैसा कि हमे अधिकार है कि हम लाउडस्पीकर मे संगीत सुन सकते है| और हमारे ऐसा करने से किसी को एतराज़ नहीं हो सकता है! क्योकि यह हमारा व्यक्तिगत अधिकार है! लेकिन यदि हम चाहें कि हम इसे रात मे छत  पर ले जाकर सुने, तो यह हमारे स्वतन्त्रता के अधिकारों का उपभोग नहीं बल्कि दूसरे के अधिकारों का हनन है! जिस प्रकार हमे लाउडस्पीकर मे संगीत सुनने कि स्वतन्त्रता प्राप्त है, उससे कही ज्यादा हमारे पड़ोसियों को चैन से सोने कि भी स्वतन्त्रता व अधिकार है! यहाँ पर हमारा यही कर्तव्य होता है कि हम अपने घर मे धीमी गति के साथ संगीत का आनंद लें! जिससे हमारी स्वतन्त्रता भी बनी रहेगी और हमारे पड़ोसियों की भी! अतः स्वतन्त्रता एक सामाजिक सुलहनामा है, नाकी व्यक्तिगत अधिकार!

स्वतन्त्रता के संदर्भ मे मैंने एक पुस्तक मे पढ़ा था कि किसी शहर मे एक व्रद्ध महिला सड़क के बीचोबीच चल रही थी! जिससे यातायात को बड़ी असुविधा हो रही थी तथा उसे भी तो बड़ा खतरा था!  जब किसी सज्जन ने उससे फुटपाथ पर चलने का निवेदन किया, तब उस महिला ने इक अजीब उत्तर दिया-“मै स्वतंत्र हूँ और जहां मै चाहूँ वहाँ चल सकती हूँ” स्वतन्त्रता का ऐसा अर्थ लगाना अत्यंत गलत है! इसका कारण यह है की यदि यह पैदल यात्री को बीच सड़क मे चलने की स्वतन्त्रता देता है तो कार या दूसरे वाहनो को फुटपाथ पर चलने की स्वतन्त्रता देता है! ऐसा स्वतन्त्रता से चारों ओर अव्यवस्था फैल जाएगी! व्यक्तिगत स्वतन्त्रता सामाजिक कानूनों की कमी मे बदल  जाएगी!

उस व्रद्ध महिला के समान ही संसार स्वतन्त्रता के नसे मे चूर होता जा रहा है! आज लोग दूसरे की स्वतन्त्रता का ख्याल नहीं करते हैं! सबको स्वतन्त्रता का बराबर फायदा मिलना चाहिए! यदि ट्राफिक पुलिस का सिपाही चौराहे पर खड़ा होकर सबको न रोके, तो वह किसी को भी न रोकेगा !  पर इसका परिणाम यह होगा की, वह चौराहा कई दुर्घटनाओं का केंद्र बन जाएगा! लोग उस जगह से कहीं जा न पाएंगे! अतः चौराहे पर खड़ा सिपाही तानाशाही का नहीं बल्कि स्वतन्त्रता का प्रतीक है! जिसका काम स्वतन्त्रता व अधिकारों की रक्षा करना है!

इस प्रकार व्यक्तिगत स्वतन्त्रता की थोड़ी सी कटौती समाज मे कानून व व्यवस्था बनाती है, और हमारी स्वतन्त्रता वास्तविक हो जाती है!

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716 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Fanny के द्वारा
July 12, 2016

It’s like you’re on a misison to save me time and money!

rahuldwivedi के द्वारा
March 14, 2011

इसी सन्दर्भ में एक कहानी याद आ गयी एक व्यक्ति सड़क पर छड़ी घुमाते चल रहा था. दूसरे व्यक्ति ने टोका तो उसका जवाब था कि मैं स्वत्रन्त्र देश का नागरिक हूँ और कुछ भी करने को स्वत्रन्त्र हूँ. दूसरा व्यक्ति मुस्कराते हुए कहा कि जनाब आपकी स्वतंत्रता वहीँ ख़त्म हो जाती है जहाँ से मेरी नाक शुरू होती है. दीपक जी, स्वत्रंत्रता की परिभाषा एवं सोच बिल्कुल सही होना चाहिए . एक सार्थक post

    Carajean के द्वारा
    July 12, 2016

    Amqiso:iugero agradecerles de corazon el noble gesto que han tenido con Fer xq siento q lo hicieron en mi nombre y en el de quienes admirabamos su ARTE,con todo lo q esa palabra implica.soy fiel oyente de metro y hoy mas q nunca me enorgullece serlo. GRACIAS METRO95.1 ad eternum Fernando Peña,mi infinito amor!!!!!!

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 11, 2011

दीपक साहू जी , एक अच्छे लेख पर थोड़े देर से नजर पड़ी. मै आपके इस लेख से पूरी तरह सहमत हु. आजादी तब तक ठीक है जब वह दुसरे की आज़ादी में खलल न डाले. अच्छा लेख.

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 13, 2011

    दीपक जी ! चलो देर आए दुरुस्त आए! आपके विचारों के लिए धन्यवाद!

    Julz के द्वारा
    July 12, 2016

    Thank you so much for sharing this amazing story. Can I forward it or direct my friends towards your posting? Yours in Christ, Michael Skype: mi17.elaphung.c9h2 Tel: +62-21-3150516

omprakash के द्वारा
March 11, 2011

साहूजी, बिलकुल सही फ़रमाया. आज़ादी सब चाहते हैं पर उस से सन्नद्ध फ़र्ज़ और जिम्मेदारियां को नहीं निभाना चाहता. मैं दुनियां के अनेक देशों में भ्रमण कर चूका हूँ और मैंने पाया मेरा देश सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फ़ैलाने में अव्वल है क्योंकि हम सभी अपना घर तो साफ़ रखेंगे परन्तु गली में कूड़ा फेंकने से बाज़ नहीं आयेंगे.

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 13, 2011

    आदरणीय पारिक जी! सही है की हमे अपनी जिम्मेदारिया कभी भी नहीं भूलनी चाहिए! आपके विचारों के लिए धन्यवाद!

    Destiny के द्वारा
    July 12, 2016

    Yeah, like I would EVER have a chance to even occupy the same room as Colin Farrell. I’m not naive to his track record, still think he’s a sexy moererf.ckth. Russel Crowe, I have had a lady boner for him for ages and ages, since before he was famous here. Yeah, he’s not physically hot at all anymore really, with the jowlies and the paunch, and being up his own ass, and all that, but I maintain that Russell circa 1995-2000 was uber manly sexiness.

brajmohan sharad के द्वारा
March 11, 2011

दीपक भाई , सुप्रभात ……दरअसल देश में आत्म अनुशासन का अभाव है …तभी स्वतंत्रता फलीभूत नहीं हो रही है …….बधाई …साथ ही ” जुगाड़ की राजनीति ” आलेख पर प्रतिक्रिया के लिए साधुवाद ……

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 13, 2011

    नमस्कार बृजमोहन जी! आपके विचारों के लिए धन्यवाद!

sunny rajan के द्वारा
March 11, 2011

स्वतंत्रता का इतनी अच्छी तरह से व्याख्यान करने के लिए आभार

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 13, 2011

    सनी जी! आपके विचारों के लिए धन्यवाद!

    Bubby के द्वारा
    July 12, 2016

    Brlciianle for free; your parents must be a sweetheart and a certified genius.

vinod के द्वारा
March 11, 2011

deepak ji! स्वतंत्रता की सार्थक va sundar vyakhya ki hai apne. Badhai.

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 13, 2011

    धन्यवाद विनोद जी!

    Lettie के द्वारा
    July 12, 2016

    Nie orzech, zgaduj dauzj:)Deięklję, zajęła mi sporo czasu. Sam robiłem też miedziane uchwyty na gazety.PS. Nie miałaś przypadkiem lecieć do Stambułu? Kiedy?

meenakshi के द्वारा
March 11, 2011

दीपक जी , आपने अपने लेख ” स्वतंत्रता के मायने ” में बिलकुल सही कहा है . “यदि हम स्वतंत्रता का उचित अर्थ समझ जाएँ ” तो हम सब (भारतवासी) सच में सुखी हो जाएंगें .काश! ऐसी उत्कृष्ट सोच हर व्यक्ति की हो सकें. जागरूकता जाग्रत करने वाला उत्तम लेख . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 13, 2011

    मीनाक्षी जी ! आपके विचारों के लिए धन्यवाद!

    Fidelia के द्वारा
    July 12, 2016

    Thanks for being on point and on taetrg!

March 10, 2011

दीपक जी वाकई स्वतंत्रता का सही रूप में इस्तेमाल ही इसे सार्थक बनाता है.

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 10, 2011

    भ्राता राजेंद्र जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

    Daveigh के द्वारा
    July 12, 2016

    Damn, I wish I could think of sohteming smart like that!

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 9, 2011

प्रिय दीपक जी ….नमस्कार ! इन अनसुलझे जवाब के लिए आप मेरा पुराना लेख दरोगा बाबू ! आई लव यू पढ़िए http://rajkamal.jagranjunction.com/2010/10/06/दरोगा-बाबू-आई-लव-यू/ धन्यवाद

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 10, 2011

    भ्राता राजकमल जी! आपने हमे पुकारा है तो हम जरूर आएंगे! खैर शंका का समाधान करने के लिए धन्यवाद! आपका – दीपक

    Doll के द्वारा
    July 12, 2016

    Olá Cleiton, Obrigado pelo comentário e bem-vindo à Escola Psicologia.Espero que com vontade e prática consiga melhorar esse seu hábito ansioso. Abraço Reo0pnder3s/10/2010

surendrashuklabhramr के द्वारा
March 8, 2011

आज लोग दूसरे की स्वतन्त्रता का ख्याल नहीं करते हैं! सबको स्वतन्त्रता का बराबर फायदा मिलना चाहिए! दीपक जी बहुत सुन्दर प्रसंग छेड़ा आप ने स्वतंत्रता को या और किसी चीज को जो लाभ दे सके लोग अपनी हे बपौती मानते हैं बस – लोगों को दुसरे की स्वतंत्रता का हनन न करके एक सीमा के दायरे में रहना चाहिए ..काश लोग इस ओर ध्यान दें ..सार्थक अभिव्यक्ति के लिए बधाई हो शुक्लाभ्रमर५

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    शुक्ल जी! हम व्यक्तिगत स्वतन्त्रता की थोड़ी सी कटौती करके दूसरे की स्वतन्त्रता का सम्मान कर सकते हैं और यही हमारा कर्तव्य है!!!! , और हमारी स्वतन्त्रता वास्तविक हो जाती है! आपके विचारों के लिए धन्यवाद!

    Adelphia के द्वारा
    July 12, 2016

    Kyrkans diakoner ska blunda för det dom ser av ökande fattigdom och tiga i församlingen på det att cerisrpantiettska riksdagsmän icke må känna obehag.

charchit chittransh के द्वारा
March 8, 2011

दीपक जी ; जय हिंद ! आपने बहुत ही अच्छे विषय को उठाया है किन्तु प्रस्तुत घटनाएं व्यक्तिगत स्वतंत्रता की नहीं मनमानी की प्रतीक हैं क्योंकि यातायात नियमों में पैदल यात्री के लिए भी चालान और दंड की व्यवस्था है .पिछले वर्ष भोपाल की यातायात पुलिस ने एक अभियान के तहत कुछ पैदल रहगिरों के चालान भी किये थे . इसी प्रकार १९८० या ८७ – ८८ में एक क़ानून ध्वनी प्रदूषण नियंत्रण के लिए भी बना था. जिसके अनुसार निजी या सार्वजानिक ध्वनि विस्तारक यन्त्र की ध्वनि १० डेसिबल से अधिक होने पर दंड का प्रावधान था. विशेष अवसरों हेतु सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति आवश्यक कर दी गई किन्तु अधिकांश जनता और पुलिस प्रशासन के लोग इस ओर अनदेखी ही किये बैठे हैं .

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    चित्रांश जी आपका धन्यवाद! आपकी बात भी ठीक है की ट्राफिक रूल को तोड़ना हमारी मनमानी भी हो सकती है! लेकिन जो मैंने लाउडस्पीकर का उदाहरण दिया है वो निश्चित ही मनमानी का नहीं व्यक्तिगत स्वतन्त्रता का प्रतीक है! जिसमे हम थोड़ी सी कटौती करके दूसरे की स्वतन्त्रता का सम्मान कर सकते हैं और यही हमारा कर्तव्य है!!!!

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    और चित्रांश जी आपकी दी हुयी जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

rajeev dubey के द्वारा
March 7, 2011

व्यक्ति और समाज के बीच स्वतंत्रता की बहस पर एक अच्छा लेख…

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    राजीव जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

    Stew के द्वारा
    July 12, 2016

    agree with most of those teams but I would add team rose and instead of espio I would have maybe marine the raccon. I do;2n8&17#t know much bout her but it might be able to work. Also this sort of seems like a sonic heroes 2?

allrounder के द्वारा
March 7, 2011

भाई दीपक जी, एक उत्तम और सशक्त लेख पर बधाई !

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    सचिन जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

    Randi के द्वारा
    July 12, 2016

    Mertins / E para quem já tinha conta no PayPal , e foi araritaribmente jogado para o paypal brasil, sem pecisar ou mesmo desejar, NEM SER CONSULTADO, já que cartão é internacional? Bacana , né…

nishamittal के द्वारा
March 7, 2011

सहिम कहा दीपक साहू जी आपने अधिकारों के साथ यदि हम कर्तव्यों का पालन करते हुए व्यवस्था बनाएं तो कठिनाइयाँ स्वत ही समाप्त होती दिखाई देंगी.

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    आदरणीय निशा जी!  आपके विचारों के लिए धन्यवाद!

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 7, 2011

श्री दीपक जी, स्वतन्त्रता तभी तक सही है जब तक हमारी स्वतंत्रता से किसी को तकलीफ न हो…आजकल लोगों की भावनाए मर चुकी है और लोग दूसरों के तकलीफों को भी नहीं समझ पाते…. बहुत ही अच्छा लेख… आकाश तिवारी

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    बंधु आकाश जी! सही है की हमे अपनी स्वतन्त्रता का उपभोग करने मे दूसरे की भी स्वतन्त्रता का भी ख्याल रखना चिहिए! आपके विचारों के लिए धन्यवाद!

vinitashukla के द्वारा
March 7, 2011

स्वतन्त्रता के सही मायने समझाती हुई सार्थक रचना.

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    विनीता जी! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

    Kerriann के द्वारा
    July 12, 2016

    A piece of erduition unlike any other!

NIKHIL PANDEY के द्वारा
March 7, 2011

दीपक जी नमश्कार …बहुत बढ़िया विषय उठाया है आपने ..हम अक्सर स्वतंत्रता का मनमाना अर्थ निकाल लेते है.. वास्तव में आपकी स्वतंत्रता वही पर सिमित हो जाती है जहा आप दुसरो की स्वतंत्रता का अतिक्रमण करते है ….. बढ़िया लेख है.. एक नया अनुभव साझा कर रहा हु .. आपको कुछ अलग लगे..यदि समय हो तो एक नजर देखे आपकी अनमोल टिप्पड़ी का इंतज़ार रहेगा.. http://nikhilpandey.jagranjunction.com/2011/03/05/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9B-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%A6%E0%A5%87/

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    निखिल जी! जब हम कर्तव्यों का भलीभाँति पालन करेंगे तभी हम सही अर्थ मे अपने स्वतन्त्रता और अपने अधिकारों का उपभोग कर पाएंगे! वही स्वतंत्रता वास्तविक होगी! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

    Audel के द्वारा
    July 12, 2016

    Triplul test este un test de screening ( nu ofera informatii certe). Valoarea mai mare fata de a medianei courpsenzatoare varstei poate sa nu insemne nimic patologic sau poate sa traga un semnal de alarma legat de evolutia ulterioara a sarcinii. Informatia trebuie interpretata in context clinic complet.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
March 7, 2011

प्रिय दीपक जी, आपने एक अनछुए विषय पर विचारणीय लेख लिखा है| इसे पढ़ कर अत्यंत ही हर्ष हुआ| स्वतंत्रता का अर्थ यह कदापि नहीं हो सकता कि हम निज स्वार्थ के निहित शेष को वेदना दें| आपसे सहमति है| आभार,

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    वाहिद जी! मै यह जानकार अत्यंत हर्षित हो गया की आप मेरे विचारों से सहमत हैं! आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

rameshbajpai के द्वारा
March 6, 2011

प्रिय दीपक जी अधिकारों का सुनहरा संसार कर्तब्यो के समुचित निर्वहन में ही निहित है | इस पोस्ट की बधाई

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    अदरणीय रमेश जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 6, 2011

प्रिय दीपक जी …नमस्कार ! यह नियम हरेक क्षेत्र में लागु होता है ….. इस ब्लागिंग में भी मेरे जैसे सिरफिरों को कई बार ट्रैफिक पुलिस वाला डंडा इस्तेमाल करना पड़ जाता है मजबुरीवश …… अच्छा लेख लिखा है आपने स्वतंत्रता बनाम कर्तव्य पर बधाई

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    राजकमल जी धन्यवाद! पर मुझे आपकी डंडे वाली बात समझ न आई?

आर.एन. शाही के द्वारा
March 6, 2011

असली स्वतंत्रता अधिकार और कर्त्तव्य के समन्वित बोध से ही सफ़ल और सार्थक हो सकती है दीपक जी । अच्छे आलेख के लिये बधाई ।

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    सही कहा शाही जी आपने! असली स्वतंत्रता अधिकार और कर्त्तव्य के समन्वित बोध से ही सफ़ल और सार्थक हो सकती है! प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

    Alyn के द्वारा
    July 12, 2016

    I’m shkoced that I found this info so easily.

Harish Bhatt के द्वारा
March 6, 2011

deepak ji saadar pranaam, बहुत ही बेहतरीन lekh ke liye hradik badhayi.

    Deepak Sahu के द्वारा
    March 8, 2011

    धन्यवाद हरीश जी!


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