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अखंडता पर चोट!

Posted On: 4 Feb, 2012 Others में

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आजकल सर्दी के मौसम मे चुनावी माहौल काफी गरम है!सभी राजनीतिक दल एक दूसरे को नीचा दिखाने व खुद को पाक साफ बताने मे कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं!बात अगर यही तक की है तो ठीक है, पर ये राजनीतिक दल तो काफी आगे जा चुके हैं! ये जिस तरह जाति व धर्म के आधार पर वोट मांगने का कार्य कर रहे हैं, उससे कहीं न कहीं देश की अखंडता पर एक गंभीर चोट पड़ रही है !
सभी राजनीतिक दल एक विशेष जाति समूह या धर्म विशेष को रिझाने मे लगे हैं, समग्र विकास, भृष्टाचार आदि का कोई मूलभूत मुद्दा ही नहीं रह गया है!अब सवाल इस बात का उठता है की क्या गरीबी , मंहगाई, भृष्टाचार आदि समस्याएँ भी इंसान के ऊपर उसकी जाति या धर्म को देख कर आने लगी हैं? क्या विकास का मुद्दा सिर्फ जाति या धर्म विशेष तक ही सीमित रह गया है?
अब तो हद ही हो गयी है, ये राजनीतिक दल कैसे कैसे तरीके भी ढूँढने लगे हैं विशेष जाति समूह को रिझाने के लिए! अब केंद्र के सत्ताधारी दल को ही ले लो!इस दल ने एक जाति विशेष को आकर्षित करने के लिए एक नमूना खोज निकाला , जो जगह जगह जाकर अपनी जाति बता रहा है और कह रहा है मुझे उस जाति का होने पर गर्व है! तो महाशय जी आप अपने माता पिता या अपने पूर्वजों पर भी गर्व कर लेते जिनकी वजह से आप इस दुनिया मे आए और ये मुकाम हासिल किया! आप जैसे पढे लिखे व समझदार पुरुष का इस तरह घूम घूम कर अपनी जाति बताना व उस आधार पर पार्टी के लिए वोट मांगना आपको शोभा नहीं देता!!
खैर ये तो सिर्फ एक उदाहरण था, राजनीति की गलियों मे आपको और भी ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे!!
आज के समय मे जहां युवा वर्ग जाति धर्म से हटकर विकास के मुद्दे पर बात करना चाहता है वही आज का नेता मंच पर भाषण के लिए जाता है तो वह प्रदेश या देश के विकास की बात बाद मे करता है! पहले बात इस बात की करता है की उसके शासनकाल मे पिछड़ों का कितना विकास हुआ,दलितों का कितना विकास हुआ अल्पसंख्यकों का कितना विकास हुआ! वो एक लाइन मे कहना ही नहीं जनता है की मेरे शासनकाल मे सम्पूर्ण जनता का कितना विकास हुआ!!
ये हमारे देश की अखंडता पर चोट नहीं तो फिर और क्या है? अगर समय रहते इसका उपाय नहीं निकाला गया तो परिणाम भयावह हो सकते हैं! ऐसे मे समझदारी जनता को ही दिखानी होगी, उसे जाति धर्म से ऊपर उठकर अपना ऐसा नेता चुनना होगा जो वास्तविक विकास करा सके!!

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376 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Terrah के द्वारा
July 12, 2016

Didn’t know the forum rules allowed such braiillnt posts.

Piyush Kumar Pant के द्वारा
February 12, 2012

जाति न पूछो प्रत्याशी की……. जांच लीजियों ज्ञान….. योग्य प्रत्याशी ही एक सक्षम नेतृत्व दे सकता है……

    Jenelle के द्वारा
    July 12, 2016

    Sharp thniikng! Thanks for the answer.

abodhbaalak के द्वारा
February 6, 2012

यार, ये नेता लोग अगर ऐसा नहीं करेंगे तो फिर इनकी दाल रोटी कैसे चलेगी घबराएं नहीं देश को अखंडता को कोई खतरा नहीं है क्योंकि लोग इनकी असलियत को …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 10, 2012

    अबोध जी!वैसे इन नेताओं ने तो कभी ढंग से विकाश कराया नहीं, जो विकास के नाम पर वोट मांगे! आज इनहोने ये नया तरीका खोज निकाला है! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    Mande के द्वारा
    July 12, 2016

    That’s really thinking at an imesvrsipe level

अलीन के द्वारा
February 5, 2012

दीपक जी, नमस्कार! “ये हमारे देश की अखंडता पर चोट नहीं तो फिर और क्या है? अगर समय रहते इसका उपाय नहीं निकाला गया तो परिणाम भयावह हो सकते हैं! ऐसे मे समझदारी जनता को ही दिखानी होगी.” सचमुच यह एक बहुत बड़ा सवाल है हम लोगों के सम्मुख…..जिसका जवाब तलाशता हुआ लेख ‘गन्दी राजनीति या हम’ आने वाले दिनों में मेरे ब्लॉग पर पढ़ना न भूले. एक बार फिर इस ज्वलंत मुद्दे को उठाने के लिए सहृदय धन्यवाद.

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 9, 2012

    पढ़ेंगे अलीन जी! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    Artie के द्वारा
    July 12, 2016

    This “free sharing” of initamrofon seems too good to be true. Like communism.

Rajkamal Sharma के द्वारा
February 5, 2012

प्रिय दीपक (चश्मे चिराग ) जी …… सप्रेम नमस्कारम ! आपकी कही हुई बाते बिलकुल ही सत्य है और हर कोई इनसे इत्तेफाक ही रखेगा …. आइये ऐसे फूट डाल कर राज करने वाले उम्मीदवारों को अपनी तर्जनी ऊँगली (अंगूठा ) की ताकत दिखला कर इनको अपनी ताकत बतलाये और इनको इनकी औकात बताए :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 9, 2012

    क्यों नहीं राजकमल जी! इनको इनकी औकात बताना बहुत जरूरी है! हम तो इनसे बाद मे हैं , पहले तो ये हमसे हैं! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद राजकमल जी!

krishnashri के द्वारा
February 4, 2012

साहू जी ,नमस्कार . तथ्य परक , वास्तविक स्थिति को उजागर करता आलेख .

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 9, 2012

    आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद . महोदय जी

nishamittal के द्वारा
February 4, 2012

दीपक जी बिलकुल सही लिखा है,आपने जातिवाद को बढ़ावा देकर देश को बांटना और अपना उल्लू सीधा करना इनका धर्म है.

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 9, 2012

    वैसे अगर ये थोड़ा सा भी राष्ट्र धर्म निभा लें, तो देश कहाँ पाहुच जाए! अदरणीय निशा जी , आपकी प्रतिकृया के लिएबहुत बहुत धन्यवाद~!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 4, 2012

आदरणीय दीपक जी, सादर अभिवादन समाज में जाग्रति पैदा कीजिये. समय हो मेरे लेख पढ़िए. बधाई.

    Deepak Sahu के द्वारा
    February 9, 2012

    क्यो नहीं प्रदीप जी! आपकी प्रतिकृया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद


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